तेरी यादों के शहर में - Long Song
तेरी यादों के शहर में - Long Song
तेरी यादों के शहर में - Long Song
अन्तरा 1
तेरी ख़ामोशी भी बोलती है,
जैसे हवा में कोई राज़ छुपा हो।
मेरी धड़कन भी सोचती है,
तू पास है या कहीं दूर खड़ा हो।
मुखड़ा
तेरी यादों के शहर में मैं अकेला चलता हूँ,
हर गली में तेरा नाम पुकारा जाता है।
पलकों पर सपनों का जाल बुनता हूँ,
दिल को लगे तू यहीं कहीं पास आता है।
अन्तरा 2
तेरी हँसी का उजाला,
मेरे अंधेरों को रोशन करता है।
तेरे बिना हर मौसम अधूरा,
तेरे बिना हर किस्सा अधूरा लगता है।
मुखड़ा (दोहराव)
तेरी यादों के शहर में मैं अकेला चलता हूँ,
हर गली में तेरा नाम पुकारा जाता है।
पलकों पर सपनों का जाल बुनता हूँ,
दिल को लगे तू यहीं कहीं पास आता है।
ब्रिज (भावनात्मक ऊँचाई)
कभी ख़तों में, कभी बारिश में,
तेरी आवाज़ सुनाई देती है।
कभी आईनों में, कभी धूप में,
तेरी परछाई नज़र आती है।
जैसे तू हर साँस के साथ जुड़ा हो,
जैसे तू ख़ुदा से भी ज़्यादा मेरा हो।
अन्तरा 3
तेरे स्पर्श की ख़ुशबू,
अभी तक मेरी हथेलियों में ठहरी है।
तेरे लफ़्ज़ों की गूँज,
मेरे कानों में जैसे प्रार्थना सी बहती है।
मुखड़ा (आख़िरी, गहन)
तेरी यादों के शहर में मैं अकेला चलता हूँ,
पर अब तन्हाई भी साथी लगती है।
तेरे प्यार की बारिश में भीगकर,
मेरी रूह आज भी तुझसे मिलती है।
समापन (आहिस्ता)
तेरी यादों के शहर में…
अब मेरा घर बस गया है।