तेरे बिना जो रात हो
तेरे बिना जो रात हो
तेरे बिना जो रात हो
अन्तरा 1
तेरे बिना जो रात हो, वो रात नहीं होती,
सितारे तो दिखते हैं पर बरसात नहीं होती।
तेरी आँखों के समंदर में डूबना चाहता हूँ,
हर लम्हा बस तुझे छूना चाहता हूँ।
मुखड़ा (कोरस)
तेरे बिना साँस अधूरी है,
तेरे बिना धड़कन भी चुप-सी है।
तू है तो जन्नत ज़मीं पर लगे,
तू ना हो तो ज़िंदगी भी रूठी है।
अन्तरा 2
तेरी बातों का असर, जैसे शाम की हवा,
थकान सारी मिटा दे, लाए नई दुआ।
तेरे होंठों से गिरा हर अल्फ़ाज़,
मेरे दिल का मुकम्मल अंदाज़।
मुखड़ा (दोहराव)
तेरे बिना साँस अधूरी है,
तेरे बिना धड़कन भी चुप-सी है।
तू है तो जन्नत ज़मीं पर लगे,
तू ना हो तो ज़िंदगी भी रूठी है।
ब्रिज (भावनात्मक ऊँचाई)
कभी ख़्वाब बनकर, कभी दुआ बनकर,
तू हर पल मेरे साथ चलता है।
कभी ख़ामोशी में, कभी नग़्मों में,
तेरा नाम दिल से निकलता है।
अगर मोहब्बत का कोई चेहरा हो,
तो शायद तेरे जैसा दिखता है।
अन्तरा 3
तेरी मुस्कुराहट में जैसे सवेरा छुपा हो,
तेरे आँचल में जैसे सारा बसेरा छुपा हो।
तेरे बिना क्या मैं, तेरे बिना क्या मेरी पहचान,
तू है तो मैं हूँ, वरना है बस वीरान।
मुखड़ा (आख़िरी, धीमा)
तेरे बिना साँस अधूरी है,
तेरे बिना धड़कन भी चुप-सी है।
तू है तो जन्नत ज़मीं पर लगे,
तू ना हो तो ज़िंदगी भी रूठी है।
समापन (धीरे fading out)
तेरे बिना… तेरे बिना…
ज़िंदगी अधूरी है…